अमर क्रांतिकारी जतिन दास : आजादी जिन्हें प्राणों से प्यारी थी।
![]() |
| 27 Oct, 1904 - 13 Sep, 1929 |
अमर क्रांतिकारी यतीन्द्र नाथ दास जो जतिन दास के नाम से भी प्रसिद्ध हैं उनकी आज पुण्य तिथि है।एक साधारण बंगाली परिवार में कलकत्ता (आधुनिक कोलकाता) में 27 अक्टूबर 1904 में जन्मे जतिन दास ने 16 वर्ष की आयु में ही देश के स्वाधीनता संग्राम में कदम रख दिया था। उन्होंने 1921 में गांधी जी के असहयोग आन्दोलन में भाग लिया। बाद में वे महान क्रांतिकारी शचीन्द्रनाथ सान्याल के सम्पर्क में आये और हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य बनें।
वर्ष 1929 में उन्हें क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण अरेस्ट कर लाहौर जेल में बंद कर दिया गया। लाहौर जेल में कैदियों के साथ होने वाले भेदभाव के खिलाफ उन्होंने आवाज उठायी। सत्याग्रही कैदियों को राजनीतिक बंदी मानकर सारी सुविधायें दी जाती थी। वहीं दूसरी ओर क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण बंद कैदियों को किसी प्रकार की सुविधा नहीं दी जाती थी और उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता था।
जतिन दास ने 13 जुलाई 1929 को इस भेदभाव के खिलाफ भूख हड़ताल प्रारम्भ की। 63 दिनों के भूख हड़ताल के पश्चात 13 सितम्बर 1929 को उनका निधन हो गया। उन्होंने अपने प्राण त्याग दिये परंतु प्रण नहीं त्यागा।
ऐसे महान वीर बलिदानी को कोटि—कोटि नमन।

