प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में सम्पन्न चुनाव में पूर्ण बहुमत के साथ जोरदार वापसी के पश्चात अपने दूसरे कार्यकाल के पहले विदेशी दौरे के लिए मालदीव को चुना। इसके कई मायने हैं। शनिवार को उन्होंने मालदीव की संसद को सम्बोधित किया। अपने सम्बोधन में उन्होंने विश्व पटल पर आतंकवाद जैसे गम्भीर मुद्दों पर भारत का पक्ष स्पष्ट किया।
पाकिस्तान का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि लोग अभी भी गुड टेरोरिस्ट और बैेड टेरोरिस्ट का भेद करने की गलती कर रहे हैं। उनके ही शब्दों में — 'आतंकवाद हमारे समय की एक बड़ी चुनौती है। यह खतरा एक देश या क्षेत्र के लिए नहीं, पूरी मानवता के लिए है। कोई दिन नहीं जाता जब आतंकवाद कहीं, किसी जगह अपना भयानक रूप दिखा कर किसी निर्दोष की जान ना लेता हो। आतंकवादियों के न तो अपने बैंक होते हैं न टकसाल और ना ही हथियारों की factory। फिर भी उन्हें धन और हथियारों की कभी कमी नहीं होती।
कहाँ से पाते हैं वे यह सब? कौन देता है उन्हें ये सुविधाएं? आतंकवाद की State sponsorship सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। यह बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि लोग अभी भी good terrorist और bad terrorist का भेद करने की गलती कर रहे हैं। कृत्रिम मतभेदों में पड़ कर हमने बहुत समय गवाँ दिया है। पानी अब सिर से ऊपर निकल रहा है। आतंकवाद की चुनौती से भली प्रकार निपटने के लिए सभी मानवतावादी शक्तियों का एकजुट होना ज़रूरी है। आतंकवाद और radicalisation से निपटना विश्व के नेतृत्व की सबसे खरी कसौटी है।
जिस प्रकार विश्व समुदाय ने climate change के खतरे पर सक्रिय रूप से विश्व-व्यापी convention और सम्मेलन किए हैं, वैसे आतंकवाद के विषय में क्यों नहीं हो सकते?
मैं विश्व-संगठनों और सभी प्रमुख देशों से अपेक्षा करूंगा कि एक समय सीमा के भीतर आतंकवाद पर global conference आयोजित करें। ताकि आतंकवादियों और उनके समर्थक जिन loopholes का फायदा उठाते हैं उन्हें बंद करने पर सार्थक विचार किया जा सके। अगर हमने अब और देर की तो आज और आज के बाद आने वाली पीढ़ियाँ हमें माफ नहीं करेंगी।'
मालदीव ने उन्हें किसी भी विदेशी नागरिक को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया है।
मालदीव की संसद को सम्बोधित किये जाने के दौरान प्रधानमंत्री मोदी जी का सम्पूर्ण अभिभाषण यहां प्रस्तुत है—
मालदीव की मजलिस के सम्माननीय अध्यक्ष,
मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति और मेरे मित्र मोहम्मद नशीद जी,
मजलिस के सम्माननीय सदस्य गण,
Excellencies,
आमंत्रित माननीय अतिथि गण,
नमस्कार।
आप सबको मैं अपनी और 130 करोड़ भारतीयों की शुभकामनाएँ देता हूँ। ईद-उल-फितर के पावन पर्व का आनंद और उत्साह अभी भी हमारे साथ हैं। आप सबको और मालदीव के सभी लोगों को मैं इस उपलक्ष्य पर बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।
अध्यक्ष महोदय,
मालदीव – यानि हज़ार से अधिक द्वीपों की माला – हिन्द महासागर का ही नहीं, पूरी दुनिया का एक नायाब नगीना है। इसकी असीम सुंदरता और प्राकृतिक संपदा हजारों साल से आकर्षण का केंद्र रही हैं। प्रकृति की ताकत के सामने मानव के अदम्य साहस का यह देश एक अनूठा उदाहरण है। व्यापार, लोगों और संस्कृति के अनवरत प्रवाह का मालदीव साक्षी रहा है। और यह राजधानी माले, विशाल नीले समंदर का प्रवेश-द्वार ही नहीं है। स्थायी, शांतिपूर्ण और समृद्धशाली हिंद महासागर क्षेत्र की यह कुंजी भी है।
अध्यक्ष महोदय,
आज मालदीव में, और इस मजलिस में, आप सबके बीच उपस्थित होकर मुझे बहुत हर्ष हो रहा है। मजलिस ने सर्वसम्मति से मुझे निमंत्रण देने का निर्णय, सम्माननीय नशीद जी के स्पीकर बनने के बाद अपनी पहली ही बैठक में लिया। आपके इस gesture ने हर भारतीय के दिल को छू लिया है। और उनका सम्मान और गौरव बढ़ाया है। इसके लिए, अध्यक्ष महोदय, मैं आपको, और इस गरिमामय सदन के सभी सम्माननीय सदस्यों को अपनी ओर से, और समूचे भारत की ओर से बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूँ।
अध्यक्ष महोदय,
आज मैं दूसरी बार मालदीव आया हूँ। और एक प्रकार से, दूसरी बार मजलिस की ऐतिहासिक कार्यवाही का साक्षी हूँ। पिछले वर्ष मैं बहुत खुशी और गर्व के साथ राष्ट्रपति सोलिह के पद-ग्रहण समारोह में शामिल हुआ था । लोकतन्त्र की जीत का वह उत्सव खुले स्टेडियम में आयोजित किया गया था। चारों ओर, हजारों उत्साहित लोग मौजूद थे। उन्हीं की शक्ति और विश्वास, साहस और संकल्प उस जीत का आधार थे। उस दिन मालदीव में लोकतन्त्र की ऊर्जा को महसूस कर मुझे एक रोमांच सा अनुभव हो रहा है । उस दिन मैंने मालदीव में लोकतन्त्र के प्रति आम नागरिक के समर्पण को और, अध्यक्ष महोदय, आप जैसे नेताओं के प्रति उनके प्यार और आदर को भी देखा। और आज, इस सम्माननीय सदन में, मैं लोकतन्त्र के आप सब पुरोधाओं को हाथ जोड़ कर नमन करता हूँ।
अध्यक्ष महोदय,
यह सदन, यह मजलिस, ईंट-पत्थर से बनी सिर्फ एक इमारत नहीं है। यह लोगों का महज़ मजमा नहीं है। यह लोकतन्त्र की वो ऊर्जा भूमि है जहां देश की धड़कने आपके विचारों और आवाज़ में गूँजती हैं। यहां आप के माध्यम से लोगों के सपने और आशायेँ सच में बदलते हैं।
यहाँ अलग-अलग विचारधारा और दलों के सदस्य देश में लोकतन्त्र, विकास और शांति के लिए सामूहिक संकल्प को सिद्धि में बदलते हैं। ठीक उसी तरह, जैसे कुछ महीने पहले मालदीव के लोगों ने एकजुट हो कर दुनिया के सामने लोकतंत्र की एक मिसाल कायम की। आपकी वो यात्रा चुनौतियों से भरी थी।
लेकिन मालदीव ने दिखाया, आपने दिखा दिया, कि जीत अंतत: जनता की ही होती है। यह कोई मामूली सफलता नहीं थी। आपकी यह कामयाबी दुनिया भर के लिए एक मिसाल और प्रेरणा है। और मालदीव की इस सफलता पर सबसे अधिक गर्व और खुशी किसे हो सकती थी? उत्तर स्वाभाविक है। आपके सबसे घनिष्ठ मित्र, आपके सबसे नजदीकी पड़ौसी और दुनिया के सबसे बड़े लोकतन्त्र – भारत को। आज आपके बीच मैं ज़ोर देकर कहना चाहता हूँ कि मालदीव में लोकतन्त्र की मजबूती के लिए भारत और हर भारतीय आपके साथ था और साथ रहेगा।
अध्यक्ष महोदय,
भारत ने भी हाल ही में मानव इतिहास की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक प्रक्रिया पूरी की है। 130 करोड़ भारतीयों के लिए यह सिर्फ चुनाव नहीं, लोकतन्त्र का महोत्सव यानि मेगा फेस्टिवल था। दो तिहाई से अधिक, यानि 60 करोड़ मतदाताओं ने वोट डाले। उन्होंने विकास और स्थिरता के पक्ष में भारी जनादेश दिया।
अध्यक्ष महोदय,
मेरी सरकार का मूलमंत्र – ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विश्व में, और खासकर अपने पड़ोस में, मेरी सरकार की विदेश नीति का भी आधार है।
‘Neighbourhood First’ हमारी प्राथमिकता है। और neighbourhood में, मालदीव की प्राथमिकता बहुत स्वाभाविक है। इसलिए, आपके बीच आज मेरी उपस्थिति संयोग मात्र नहीं है। पिछले दिसम्बर में, राष्ट्रपति सोलिह ने भारत को अपना पहला गंतव्य बनाया था। और अब मालदीव का स्नेहपूर्ण निमंत्रण, मुझे मेरे इस कार्यकाल में पहली विदेश यात्रा पर मालदीव ले आया है। इस यात्रा में, विदेशियों के लिए आपके देश के सबसे बड़े सम्मान से भी मुझे नवाज़ा गया है। मेरे पास धन्यवाद देने के लिए शब्द नहीं हैं।
अध्यक्ष महोदय,
भारत और मालदीव के संबंध इतिहास से भी पुराने हैं। अनादि काल से, सागर की लहरें हम दोनों देशों के तटों को पखार रही हैं। ये लहरें हमारे लोगों के बीच मित्रता का संदेश-वाहक रही हैं। हमारी सभ्यता और संस्कृति इन तरंगों की शक्ति लेकर फली-फूली हैं। हमारे रिश्तों को सागर की गहराई और विस्तार का आशीर्वाद मिला है। विश्व के सबसे पुराने बन्दरगाहों में से एक लोथल मेरे home state गुजरात में था। ढाई हज़ार साल से भी पहले लोथल, और बाद के समय में सूरत जैसे शहरों के साथ, मालदीव के व्यापारिक संबंध रहे हैं।
मालदीव की कौड़ियां भारत के बच्चों तक की प्रिय रही हैं। संगीत, वाद्य यंत्र, रस्मो-रिवाज – ये सब हमारी साझा विरासत के ज्वलंत उदाहरण हैं। दिवेही भाषा को लें। Week को भारत में हफ्ता कहते हैं, दिवेही में भी। दिनों के नाम देखें। Sunday is Aadittha (आदीथा) in Divehi॰ यह आदित्य यानि, सूरज से जुड़ा है। सोमवार यानी मंडे, दिवेही में है HOMA। जो सोम से यानि चंद्रमा से समानता रखता है।
और world को दिवेही में कहते हैं ‘धुनिये’ और भारत में ‘दुनिया’। मालदीव में ‘दुनिया’ एक प्रसिद्ध नाम भी है। दुनिया की तो बात ही क्या, भाषा की यह समानता यहाँ से परे ‘स्वर्ग’ और ‘नरक’ तक भी फैली हुई है। इनके लिए दिवेही में ‘सुवरुगे’ और ‘नरका’ शब्द हैं। List बहुत लंबी है, बोलता गया तो पूरा शब्दकोष बन जाएगा। लेकिन संक्षेप में कहूँ तो हर कदम पर साफ है कि हम एक ही गुलशन के फूल हैं। इसलिए, मालदीव की सांस्कृतिक धरोहर के संवर्धन, manuscripts के सरंक्षण और दिवेही भाषा के शब्दकोष के विकास जैसे projects में मालदीव को सहयोग देना हमारे लिए बहुत महत्व रखता है।
और इसीलिए, Friday Mosque के conservation में भारत के सहयोग की घोषणा करते हुए आज मुझे बेहद खुशी हुई। CORAL से बनी इस ऐतिहासिक मस्जिद जैसी दूसरी मालदीव के बाहर दुनिया में कहीं नहीं हैं। मालदीव के निवासियों ने सैकड़ों साल पहले समुद्र की नेमत से मस्जिद के अद्वितीय architecture की रचना की। इससे प्रकृति के प्रति उनके सम्मान और सामंजस्य का पता चलता है।
खेद का विषय है कि आज सामुद्रिक सम्पदा पर प्रदूषण के बादल छा रहे हैं। ऐसे में, इस विलक्षण मस्जिद का conservation इतिहास ही नहीं, हमारे पर्यावरण के संरक्षण का संदेश विश्व को देगा।
अध्यक्ष महोदय,
मालदीव में स्वतंत्रता, लोकतन्त्र, खुशहाली और शान्ति के समर्थन में भारत मालदीव के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहा है। चाहे वह 1988 की घटना हो, या 2004 की Tsunami जैसी प्राकृतिक आपदा या फिर हाल का पानी-संकट। हमें गर्व है कि भारत हर मुश्किल में, आपके हर प्रयास में हर घड़ी हर कदम आपके साथ खड़ा है आपके साथ चला है। और अब हमारे दोनों देशों में विकास, समृद्धि और स्थिरता के पक्ष में भारी जनादेश ने आपसी सहयोग के लिए नए रास्ते खोले हैं।
राष्ट्रपति सोलिह की पिछली यात्रा में 1.4 बिलियन डॉलर के इकोनॉमिक पैकेज पर सहमति हुई थी। उसके क्रियान्वयन में उत्साहजनक प्रगति हुई है। मालदीव के विकास के लिए भारत के सहयोग का अटल focus है – मालदीव के लोगों का सामाजिक-आर्थिक विकास। चाहे द्वीपों में पानी और सफाई के विषय हों या इनफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण। चाहे स्वास्थ्य सेवा हो या शिक्षा। भारत के सहयोग का आधार होगा लोक-कल्याण, और मालदीव की ज़रूरतें और प्राथमिकताएँ।
हमारे दर्जनों Social Impact projects और अन्य सहयोग कार्यक्रम मालदीव के लोगों के जीवन को नजदीक से छू रहे हैं। और उनके जीवन को बेहतर बनाने के आपके प्रयासों का पूरक बन रहे हैं। मालदीव में लोकतन्त्र और समृद्धि के लिए भारत एक विश्वसनीय, मज़बूत और अग्रणी सहयोगी बना रहेगा। और हमारा यह सहयोग आप सभी जन-प्रतिनिधियों के हाथ मज़बूत करेगा।
अध्यक्ष महोदय,
देशों के संबंध सिर्फ सरकारों के बीच नहीं होते। लोगों के बीच संपर्क उनका प्राण होते हैं। इसलिए, मैं उन सभी उपायों को विशेष महत्व देता हूँ जिनसे people-to-people exchanges को बढ़ावा मिले। अत: मुझे विशेष खुशी है कि हमने आज दोनों देशों के बीच ferry service पर समझौता किया है। मुझे इस बात की भी खुशी है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस, आदि के लिए भारत आने वाले मालदीवियों को वीज़ा facilitation agreement से और सुविधा हुई है।
अध्यक्ष महोदय,
आपसी सहयोग को आगे बढ़ाते हुए हमें आज के संसार की गहन अनिश्चितताओं और गंभीर चुनौतियों का भी ध्यान रखना है। Technology में भारी प्रगति से उत्पन्न ‘disruptions’, बहुध्रुवीय विश्व में आर्थिक और सामरिक धुरियों में बदलाव, प्रतिद्वंदिता और प्रतिस्पर्धा, साइबर स्पेस आदि से संबन्धित यूं तो बहुत से विषय हैं। परंतु में उन तीन चुनौतियों का ज़िक्र करना चाहूँगा जो हम दोनों देशों के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं।
अध्यक्ष महोदय,
आतंकवाद हमारे समय की एक बड़ी चुनौती है। यह खतरा एक देश या क्षेत्र के लिए नहीं, पूरी मानवता के लिए है। कोई दिन नहीं जाता जब आतंकवाद कहीं, किसी जगह अपना भयानक रूप दिखा कर किसी निर्दोष की जान ना लेता हो। आतंकवादियों के न तो अपने बैंक होते हैं न टकसाल और ना ही हथियारों की factory। फिर भी उन्हें धन और हथियारों की कभी कमी नहीं होती।
कहाँ से पाते हैं वे यह सब? कौन देता है उन्हें ये सुविधाएं? आतंकवाद की State sponsorship सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। यह बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि लोग अभी भी good terrorist और bad terrorist का भेद करने की गलती कर रहे हैं। कृत्रिम मतभेदों में पड़ कर हमने बहुत समय गवाँ दिया है। पानी अब सिर से ऊपर निकल रहा है। आतंकवाद की चुनौती से भली प्रकार निपटने के लिए सभी मानवतावादी शक्तियों का एकजुट होना ज़रूरी है। आतंकवाद और radicalisation से निपटना विश्व के नेतृत्व की सबसे खरी कसौटी है।
जिस प्रकार विश्व समुदाय ने climate change के खतरे पर सक्रिय रूप से विश्व-व्यापी convention और सम्मेलन किए हैं, वैसे आतंकवाद के विषय में क्यों नहीं हो सकते?
मैं विश्व-संगठनों और सभी प्रमुख देशों से अपेक्षा करूंगा कि एक समय सीमा के भीतर आतंकवाद पर global conference आयोजित करें। ताकि आतंकवादियों और उनके समर्थक जिन loopholes का फायदा उठाते हैं उन्हें बंद करने पर सार्थक विचार किया जा सके। अगर हमने अब और देर की तो आज और आज के बाद आने वाली पीढ़ियाँ हमें माफ नहीं करेंगी।
अध्यक्ष महोदय,
मैंने climate change का उल्लेख किया। इसमें संदेह नहीं कि इस सच्चाई को हम रोज़ जी रहे हैं। सूखती नदियां और मौसम की अनिश्चितता हमारे किसानों को प्रभावित कर रही हैं। पिघलते हिमखंड और समुद्र का बढ़ता स्तर मालदीव जैसे देशों के के लिए अस्तित्व का खतरा बन गए हैं। कोरल द्वीपों और समुद्र से जुड़ी आजीविका पर pollution कहर बरपा रहा है।
अध्यक्ष महोदय, आपने समुद्र की गहराई में विश्व की पहली कैबिनेट बैठक करके इन खतरों की ओर संसार का ध्यान खींचा था। उसे कौन भूल सकता है?
मालदीव ने sustainable development के लिए और कई पहल की हैं। मुझे खुशी है कि मालदीव इंटरनेशनल सोलर Alliance में शामिल हुआ है। भारत की इस संयुक्त पहल ने पर्यावरण के संरक्षण के लिए दुनिया के देशों को एक व्यावहारिक मंच प्रदान किया है। Climate change के कई परिणामों का समाधान renewable energy के सशक्त विकल्प से मुमकिन है।
सन 2022 तक 175 गीगा वाट renewable energy के लिए भारत के लक्ष्य और उसे हासिल करने में हुई आशातीत प्रगति से यह सम्माननीय सदन भली प्रकार परिचित है। और अब भारत के सहयोग से माले की सड़कें ढाई हज़ार LED street lights के दूधिया प्रकाश में नहा रही हैं। और 2 लाख LED बल्ब मालदीव वासियों के घरों और दुकानों को जगमगाने के लिए आ चुके हैं।
इनसे बिजली बचेगी और खर्चा भी। और ये पर्यावरण के अनुकूल भी रहेंगे। पर्यावरण के संबंध में छोटे द्वीपों की भारत ने विशेष चिंता की है। उनकी विशिष्ट समस्याओं के समाधान के लिए हमने सहयोग ही नहीं किया, बल्कि दुनिया के तमाम मंचों पर आवाज़ भी उठाई है। लेकिन, सम्मिलित प्रयास और बड़े पैमाने पर करने की ज़रूरत है।
लेकिन अगर कोई यह सोचे की सिर्फ technology से यह समस्या हल हो जाएगी, तो यह सही नहीं होगा। Climate change का प्रतिकार मूल्यों में, सोच में, जीवन-शैली में और समाज में बदलाव के बिना संभव नहीं है। प्राचीन भारतीय दर्शन में माना गया कि, “माता भूमि:, पुत्रोहं पृथ्वीया:”। अगर हम पृथ्वी को अपनी माता मानेंगे, तो हम उसका सम्मान और सरंक्षण ही करेंगे, नुकसान नहीं। हमें ध्यान रखना होगा कि यह पृथ्वी, आने वाली पीढ़ियों की धरोहर है। हम इसके स्वामी नहीं, सिर्फ trustee हैं।
अध्यक्ष महोदय,
तीसरा विषय है हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र, जो हमारा साझा क्षेत्र है। यहाँ दुनिया की 50% जनसंख्या निवास करती है। और धर्मों, संस्कृतियों, भाषाओं, इतिहास तथा राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्थाओं की विविधता है। परंतु, इस क्षेत्र में बहुत से अनुत्तरित प्रश्न और अनसुलझे विवाद हैं।
Indo-Pacific क्षेत्र हमारी जीवन रेखा है और व्यापार का राजमार्ग भी है। यह हर मायने में हमारे साझा भविष्य की कुंजी है। इसलिए, मैंने जून 2018 में सिंगापुर में बोलते हुए Indo-Pacific Region में खुलेपन, एकीकरण एवं संतुलन कायम करने के लिए सबके साथ मिलकर काम करने पर ज़ोर दिया था। ऐसा करने से ही राष्ट्रों के बीच विश्वास बनेगा। और नियम-सम्मत व्यवस्थाएँ तथा multilateralism कायम रहेंगे।
अध्यक्ष महोदय,
चार वर्ष पूर्व मैंने हिंद महासागर क्षेत्र के लिए SAGAR के विज़न और प्रतिबद्धता को रेखांकित किया था। इस शब्द SAGAR का हिन्दी में अर्थ है समुद्र। SAGAR, यानि Security And Growth for All in the Region हमारे लिए Indo-pacific में सहयोग का blueprint है। समावेशिता के इस सिद्धांत पर आज मैं फिर ज़ोर देना चाहूँगा। मैं यह भी कहना चाहता हूँ कि भारत अपनी शक्ति और क्षमताओं का उपयोग केवल अपनी समृद्धि और सुरक्षा के लिए ही नहीं करेगा।
बल्कि इस क्षेत्र के अन्य देशों की क्षमता के विकास में, आपदाओं में उनकी मानवीय सहायता के लिए, तथा सभी देशों की साझा सुरक्षा, संपन्नता और उज्ज्वल भविष्य के लिए करेगा। समर्थ, सशक्त और समृद्ध भारत दक्षिण एशिया और Indo-Pacific में ही नहीं, पूरे विश्व में शांति, विकास और सुरक्षा का आधार स्तम्भ होगा।
अध्यक्ष महोदय,
इस विज़न को साकार करने में, और Blue Economy में सहयोग के लिए, भारत को मालदीव से बढ़कर कोई भागीदार नहीं मिल सकता। क्योंकि हम सामुद्रिक पड़ोसी हैं। क्योंकि हम मित्र हैं। और दोस्तों में कोई छोटा और बड़ा, कमज़ोर और ताकतवर नहीं होता। शांत और समृद्ध पड़ौस की नींव भरोसे, सद्भावना और सहयोग पर टिकी होती है।
और यह भरोसा इस विश्वास से आता है कि हम एक-दूसरे की चिंताओं और हितों का ध्यान रखें। जिससे हम दोनों ही और अधिक समृद्ध हों, और अधिक सुरक्षित रहें। ऐसा तभी संभव है जब हम अच्छे वक्त में और बुरे में भी, आपसी विश्वास को और पुख्ता करें।
अध्यक्ष महोदय,
हमारा दर्शन और हमारी नीति है: वसुधैव कुटुंबकम। यानि सारी दुनिया एक परिवार है। युगपुरुष महात्मा गांधी ने कहा था: “There is no limit to extending our services to our neighbours.” भारत ने अपनी उपलब्धियों को हमेशा विश्व के साथ और खास कर पड़ौसियों के साथ साझा किया है।
इसलिए, भारत की विकास साझेदारी लोगों को सशक्त करने के लिए है। उन्हें कमजोर करने के लिए नहीं। और न ही हम पर उनकी निर्भरता बढ़ाने के लिए। या भावी पीढ़ियों के कंधों पर कर्ज़ का असंभव बोझ डालने के लिए।
अध्यक्ष महोदय ,
यह समय चुनौतियों से भरा एक जटिल संक्रांति काल है। परन्तु, चुनौतियां अवसर भी लाती हैं। आज भारत और मालदीव के पास अवसर है:
o पड़ोसियों के बीच मित्रतापूर्ण संबंधों का आदर्श बनने का;
o आपसी सहयोग से हमारे लोगों की आर्थिक, सामाजिक व राजनैतिक आकांक्षाओं को पूरा करने का;
o अपने क्षेत्र में स्थायित्व, शांति और सुरक्षा स्थापित करने के लिए मिलकर काम करने का;
o विश्व की सर्वाधिक महत्वपूर्ण समुद्री लेन को सुरक्षित रखने का;
o आतंकवाद को हराने का;
o आतंकवाद और अतिवाद का पोषण करने वाली शक्तियों को दूर रखने का;
o और स्वस्थ तथा स्वच्छ परिवेश और पर्यावरण के लिए आवश्यक बदलाव लाने का।
इतिहास को, और हमारे नागरिकों को हमसे अपेक्षा है कि हम ये अवसर जाने नहीं देंगे, और इनका पूरा लाभ उठायेंगे। इस प्रयास में पूरा-पूरा सहयोग करने के लिए, और मालदीव के साथ अपनी अनमोल मैत्री को और गहन करने के लिए भारत दृढ़ प्रतिज्ञ है।
यह पावन संकल्प मैं आज आपके बीच दोहराता हूँ। मुझे आपने अपने बीच आने का मौका दिया।
एक बार फिर इस बड़े सम्मान के लिए धन्यवाद।
आपकी मित्रता के लिए धन्यवाद।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
PM @narendramodi was conferred The Most Honourable Order of the Distinguished Rule of Nishan Izzuddeen during his visit to the Republic of Maldives.— PMO India (@PMOIndia) June 8, 2019
This is the highest honour of the Maldives that is accorded to foreign dignitaries. pic.twitter.com/joUJpic3j8
Terrorism is a major challenge the world faces.
— Narendra Modi (@narendramodi) June 9, 2019
State sponsorship of terror is an issue we will have to deal with.
There is no point of seeing terrorists as good terrorists and bad terrorists.
A terrorist is a terrorist whose hateful ideology has no place in our planet. pic.twitter.com/GrJF4l5HfQ
Humbled to receive The Most Honourable Order of the Distinguished Rule of Nishan Izzuddeen.
— Narendra Modi (@narendramodi) June 8, 2019
I dedicate this award to the values and ethos of India, as well as the ever lasting friendship between India and Maldives. pic.twitter.com/dlkDDWETiN
Dear citizens of the Republic of Maldives,
— Narendra Modi (@narendramodi) June 9, 2019
I am humbled by the affection I have received in you wonderful nation. Thank you for being great hosts.
I also thank the Government for the hospitality.
This visit will lead to stupendous outcomes, adding vigour to bilateral ties. pic.twitter.com/CpgWmtmUfX
